Valuable QuestionCategory: सामान्य ज्ञानबेटा-बेटी के बराबर हक़ की बात तो सभी करते हैं, क्या दोनों की ज़िम्मेदारियाँ बराबर हैं?
jaydip asked 2 months ago

All the rights of son and daughter are right, do the responsibilities of both are equal?

1 Answers
Jaydip answered 2 months ago

जिम्मेदारिया कहाँ बराबर है? मुझे तो दिखती नहीं।
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* बचपन से ही बेटियों को कहना शुरू कर दिया जाता है कि ये तो पराया धन है, इसको काम सिखाओ, अगले घर जाकर ये क्या करेगी? ब्ला ब्ला ब्ला। बेटियों पर बचपन से ही जिम्मेदारी होती है सबकी उम्मीदों पर खरा उतरने की और खुद को साबित करने की। वहीं बेटों को खूब खिलाया पिलाया जाता है, बहुत सम्भाल कर रखा जाता है क्योंकि उन्हें तो वंश आगे चलाना है। बेटे बचपन से ही मान लेते है कि इधर मैं रोया और उधर पूरा परिवार एक पैर पर खड़ा हो जायेगा जिसका वो जमकर फ़ायदा भी उठाता है।
* स्कूल में बेटियों पर जिम्मेदारी होती है कि वो खुद को सबसे बेहतर साबित करे वरना उनकी पढ़ाई बारवीं के बाद बन्द और फिर शादी व घर ग्रहस्थी। जबकि बेटे अगर फेल हो जाते है तो घरवाले सभी गहरी चिंता में डूब जाते है कि इसका भविष्य कैसा होगा और अब अचानक से लाड़ प्यार में बिगड़े हुए बेटे को सुधारने की एक जंग छिड़ जाती है लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं छुड़वाई जाती।
बेटियों को बचपन से ही एक मानसिक प्रताड़ना से गुज़रना पड़ता है कि वो लड़की है और लड़के की बराबरी नहीं कर सकती।कोई उन्हें नहीं समझाता कि बराबरी करने की गुंजाइश ही नहीं है, वो खुद अपने आप में बेहतरीन है। बेटो को बचपन से ही ये मानसिकता बना दी जाती है कि वो लड़की से आगे है और लड़की किसी भी कीमत पर उसके बराबर नहीं आ सकती, जिसका खामियाजा अन्ततः बेटो को ही भुगतना पड़ता है।
* बेटियों के ऊपर घर के काम की जिम्मेदारी होगी और साथ ही पढ़ाई या ऑफिस के काम की भी फिर भी जब उसे ऑफिस से थोड़ी रियायत मिलती है जल्दी घर लौटने की तो उस पर कटाक्ष किए जाते है बिना उसकी दोहरी जिम्मेदारी को समझे। वहीं बेटो को लड़का होने के चलते कठिन से कठिन काम की जिम्मेदारी दे दी जाती है।
* शादी के बाद बेटियों पर जिम्मेदारी होती है कि वो अपना पिछला सब कुछ भूल जाए, उसे दुखी होने का भी वक़्त नहीं दिया जाता और उम्मीद की जाती है कि वो ससुराल में नौकरानी की तरह काम करे और थकान भी महसूस ना करें। उसे खुद को अच्छी बहु सबित करने के लिए खुद को भूलना पड़ता है। लड़को की ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं मानी गई है।
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ना ही जिम्मेदारी बराबर है और ना ही हक बराबर है। दोनों को अपनी-अपनी परिस्थितियों और जिम्मेदारी के हिसाब से अधिकार दिये जाए तो बेहतर होगा।