Valuable QuestionCategory: सामान्य ज्ञानजीनांतरित फसलें (GM फसल) क्या होती हैं और इनसे क्या फायदा है? क्या ऐसे फसलें भारत में सफल हो रहे हैं?
Jaydip asked 2 weeks ago

What are GM crops and what are the benefits of this? Are such crops successful in India?

1 Answers
Jaydip answered 2 weeks ago

* जैनेटिक इंजीनियरिंग(genetic engineering) के द्वारा किसी भी जीव या पौधों के जीन को दूसरे पौधों में डाल कर एक नई प्रजाति विकसित कर सकते हैं। वैसे प्रकृति में जीनों का जोड़-तोड़ चलता रहता है। इधर के जीन उधर और उधर के इधर। पर प्रकृति में यह बड़ी धीमी प्रक्रिया है, कई हजारों लाखों वर्षों में पूरी होती हैं क्योंकि प्रकृति पूरी तरह तसल्ली करके ही किसी पौधे या जानवर या सूक्ष्मजीव को पनपने देती है, वरना उसे खत्म कर देती है।
————
* लेकिन आज जैनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से जीनों को एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में डाला जा रहा है। इस प्रकार प्राप्त फसलों को परजीनी फसलें यानी जैनेटिकली मोडिफाइड क्रॉप (Genetically modified crops) कहा जाता है। जैव अभियांत्रिकी गतिविधियों के द्वारा जीन स्तर तक परिवर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में पौधे में नए जीन यानी डीएनए को डालकर उसमें ऐसे मनचाहे गुणों का समावेश किया जाता है जोकि प्राकृतिक रूप से उस पौधे में नहीं होते हैं।
———-
* इसके लिए शोधकर्ता टिश्यू कल्चर, उत्परिवर्तन द्वारा और नए सूक्ष्मजीवों की मदद से पौधों में नए जीनों का प्रवेश कराते हैं।
इस तरह से ऐसा पौधे जो कीटों के प्रति, सूखे जैसी पर्यावरण परिस्थिति और बीमारियों के प्रति कम प्रतिरोधी हों उसे प्रतिरोधी बनाया जा सकता है या फिर हम जीनांतरित फसलों से उत्पादन क्षमता और पोषकता को बढ़ा सकते हैं।
—————
* कपास भारत की पहली जीनांतरित फसल हैं। बीटी कॉटन को सन 2002 में कानूनी रूप से मान्यता मिली थी। बीटी bacillusthuringiensis बेक्टेरिया के संक्षिप्त नाम के रूप में उपयोग किया जाता है। इस बेक्टीरिया में उपस्थित विशेष जीन, जिसे सीआरवायी (Cry1Ac) जीन कहते हैं, की मदद से यह एक प्राकृतिक कीटनाशक जिसे सीआरवाय टॉक्सिन (Cry) कहते हैं, बनाया जाता है। जब इस जीन को पौधे में डाला जाता है तो पौधा कीटनाशक उत्पन्न करता है जिससे वह कीटों के प्रति प्रतिरोधक हो जाता है। आज भारत विश्व में कपास उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। भारत में बीटी बैंगन, बीटी चावल, बीटी भिंडी, जीनांतरिक टमाटरों व और भी अन्य जीनांतरित फसलों को कानूनी मान्यता देने के तहत उनका परिक्षण चल रहा है।