Valuable QuestionCategory: सामान्य ज्ञानक्या कुतुब मीनार वास्तव में एक बत्तीघर था?
Jaydip asked 3 weeks ago

Was the Qutub Minar really a light house?

1 Answers
Jaydip answered 3 weeks ago

* इसकी संभावना तो पूरी पूरी है कि कुतुब मीनार यह मुगल लोगों के भारत मे आने से बहोत पहले बन चुका था।
* इस विषय मे पु.ना. ओक जी ने काफी संशोधन किया है। उनके संशोधन को काफी मान्यता भी मिली है। उनके जो तर्क हैं वो काफी हद तक अकाट्य हैं।
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* फिर भी भारत की या भारतीयों की अस्मिता को दबा कर रखने के गलत इरादे से अंग्रेजो ने उल्टे सीधे तरीके के इतिहास को रचा और 100 से अधिक साल तक हमे पढ़ा दिया गया।
* इस गलत इतिहास को सही ढंग से लिखने और पढ़ने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि पुरानी मान्यता को भूलना कठीण होता है। और मानसिक गुलामी जो मैकाले हमे विरासत में दे गया है उससे ऊपर उठने में देर लगेगी।
इतिहास को पढ़ना और पढाना ऐच्छिक कर देना चाहिए या उसे अपने पसंद के तरीके से पढ़ने की आजादी देने की आवश्यकता है।
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* मगर हिन्दू मुसलमान के झगड़ो और वोटों की राजनीति से ऊपर उठना हमारे भ्रष्ट नेताओं के बस की बात नही है।
* इतिहास को एक कहानी के रूप में नही बल्कि एक तर्क शुद्ध उपपत्ति के रूप में अगर पढ़ाया जाय तो यह सम्भव हो सकता है।
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* जैसे कि कुतुब मीनार बनाने की विधि कैसी रही होगी? बिना किसी क्रेन या अत्यधुनिक मशीनों के इस तरह के निर्माण उन दिनों कैसे होते थे। और इतने भव्य और भारी सामान को इतनी ऊंचाई तक पहुचाने के तरीके क्या थे।ऐसे तरीके से निर्माण कार्य मे कितना समय लगता था?
* कुतुबुद्दीन ऐबक का राजकाल इतना कम था कि उस निर्माण का कार्य इसके राजकाल में संभव ही नही था।
* ये बात तो अब सिद्ध हो गई है। मगर इसे पचाना अभी विद्वानों को मुश्किल जा रहा है।
हमारी सोच और तर्क से अधिक महत्व वोटों की राजनीति का हो गया है।
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* ऊपर दिए गए तर्क के सिवाय ऐसे और सेंकडों तर्क है जो इस बात को सिद्ध करते हैं कि कुतुब मीनार काफी पुराना निर्माण है और इसे बनाने काफी ज्यादा समय लगा था। और इसे ऐबक ने बनाया होने की सभांवना नही है।
* ऐसी ही कि बाते ताज के बारेमे भी है मगर वोटों की राजनीति से और दासता की मानसिकता से उभरने में समय लगेगा।
* वहीं एक इतिहास संशोधन संबंध में महाराष्ट्र में घटी कहानी रोचक है। श्री शिवाजी महाराज की जन्म तिथि के विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने एक समिति का गठन करवाया और उन विद्वानों के द्वारा निश्चित तिथि को ही आज शिवाजी जयंती मनाई जाती है।अब शिवाजी जयंती 19 फरवरी को ही मनाई जाती है।
* इस तरीके से अगर कोई प्रक्रिया चलाई जाय तो इतिहास में पढ़ाई जाने वाली गलतीयो को सुधारा जा सकता है।